Baba Singheshwar Sthan

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सिंहेश्वर स्थान हिन्दुओं का देश में एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है | यह बिहार के मधेपुरा जिला मुख्यालय से 6 कि० मि० की दूरी पर स्थित है | इस स्थान पर भगवान् शिव का दिव्या शिवलिंग स्थापित है जो अपने ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के कारण बहुत प्रसिद्ध हैं |
यहाँ स्थित प्राचीन शिव मंदिर इस जिले का प्रमुख आकर्षण केन्द्र है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, ऋषया श्रृंग के आश्रम में एक प्राकृतिक शिवलिंग उत्पन्न हुई थी। उस स्थान पर बाद में एक खूबसूरत मंदिर बना। एक व्यापारी जिसका नाम हरि चरण चौधरी था, ने वर्तमान मंदिर का निर्माण लगभग 200 वर्ष पूर्व करवाया था। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के दिन भक्तों तथा श्रद्धालुओं की यहाँ अपार भीड़ रहती है और हर वर्ष यहाँ मेला भी लगता है जहाँ दूर दूर से व्यपारी आते हैं
हर सावन में यहाँ श्रृंगार पूजा का बहुत बड़ा महत्व हैं जिसे कराने के लिए एक वर्ष पूर्व ही लाइन लगाना पड़ता है.
एक पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है की राजा दशरथ ने उनसे पुत्रेष्ठी यज्ञ यहीं कराया था जिसके कारण श्रीराम सहित चार भाईयों का जन्म हुआ था। निकटवर्ती सतोखर गांव में पुत्रेष्ठी यज्ञ के निमित्त सात तालाब खोदे गए थे। जिनका भग्नावशेष आज भी द्रष्टव्य माना जाता है। पुत्रेष्ठी यज्ञ की सफलता के कारण ही यहां पुत्र कामना लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की कमी नहीं है।

एक अन्य विश्लेषण बाराह पुराण से उद्धृत है कि जब हिरण का छद्मवेष धारण कर भगवान शिव वन में विचरण कर रहे थे और देवताओं के समक्ष राक्षसों से सुरक्षा की विकट स्थिति उत्पन्न हुई थी तो ब्रह्मा, विष्णु और इन्द्र ने हिरण को पहचान कर उन्हें ले जाना चाहा। लेकिन शिव नहीं माने तो तीनों देवताओं ने उन्हें पकड़ा। तभी भगवान शिव की लीला यह हुई कि जिन अंगों को देवताओं ने पकड़ा वे उनके हाथ में ही रह गए और अंतत: सींग (ऋंग) वाला हिस्सा जिस स्थान पर रहा वहीं ऋंगेश्वर हो गया।
यहां रविवार और सोमवार को श्रद्धालुओं का बड़ा तांता लगता है। मंदिर में रुद्राभिषेक, जलाभिषेक एवं विवाह, जेनेऊ, मुंडन जैसे संस्कारों को संपन्न कराने भी श्रद्धालु आते हैं…

 


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